रुद्राक्ष और भगवान शिव का सम्बन्ध

समस्त संसार के लोग रुद्राक्ष (Rudraksha) के गूढ़ गुणधर्मो के कारण उसके प्रति आकर्षित रहें हैं। बल्कि, यह एक बहुत बड़ा आश्चर्य है कि पेड़ उगने वाले फल का बीज, दुनिया भर मे अतिशय ध्यान व रूचि का केंद्र रहा है। साधू-संतों के अलावा साधारण लोग, विद्वानों से लेकर व्यवसायियों तक सभी वर्ग के लोग रुद्राक्ष (Rudraksha) का उपयोग व इसकी उपासना करते आये हैं। रुद्राक्ष (Rudraksha) अनादि काल से जाना पहचाना और उपयोग मे लाया जाता रहा है। रुद्राक्ष (Rudraksha) का मूल स्वरुप हिन्दू त्रिदेव मे से एक हैं – भगवान शिव (Lord Shiva)। प्राचीन समय से शिव कि प्रतिकृतियां और मूर्तियां इन बीजों को धारण करती हुई दिखाई व बताई जाती रही हैं।

शिव (Shiva), महादेवा, योगेश्वरा, भोलेनाथ या नटराज, संस्कृत में, शिव (Shiva) का अर्थ है शुभ जो की एक प्रमुख वैदिक, हिमालय और हिंदू देवता हैं, और बुराई नाश करने वाले हैं। शिव (Shiva) एक योगी हैं जिन्हें दुनिया में होने वाली हर चीज का पता है और यह जीवन का मुख्य पहलू है।

भगवान शिव (Lord Shiva) का एक अनोखा रूप है। उन्हें प्रकृति से अलंकरण के साथ दर्शाया गया है। उनके गले में सांप लिपटा हुआ है, और उनके शरीर को ढंकने के लिए बाघ की खाल है। जबकि एक अर्धचंद्राकार चाँद उनके सिर को सजाता है, गंगा उनके तलवे से बहती है। उनका पूरा शरीर पवित्र राख से ढंका है। उन्हें मोतियों की माला या बल्कि रुद्राक्ष के पेड़ (Rudraksha Tree) से बने बीजों को पहने हुए दिखाया गया है, जिससे विश्वासियों में बहुत उत्सुकता पैदा होती है।

हिन्दू ग्रन्थ रुद्राक्ष (Rudraksha) को शिव (Shiva) से जोड़ते हैं, जो समस्त देवताओं में प्रधान हैं। उन्हें महादेव नाम से जाना जाता है, और मान्यता है कि रुद्राक्ष का पेड़ उनके अश्रुओं से उत्पन्न हुआ है। (Rudraksha means “Tear of Lord Shiva”) संस्कृत में रूद्र (Rudra) याने शिव और अक्ष का अर्थ है आँख। कई लोग मानते हैं और हमारे शास्त्र भी कहते हैं कि बीजों से अधिकतम लाभ उठाने के लिए शिवजी का आशीर्वाद प्राप्त होना परम आव्यशक है। मात्र रुद्राक्ष (Rudraksha) शब्द के उच्चारण से भाव स्पन्द उठते हैं जो अंतरात्मा को स्पर्श करते हैं और भगवान् के समीप लाते हैं। हमारे शास्त्र भी रुद्राक्ष (Rudraksha) नाम का उच्चारण, उसके दर्शन, स्पर्श व धारण का महत्व बताते हैं।

रुद्राक्ष और भगवान शिव का सम्बन्ध (Relationship between Rudraksha and Lord Shiva)

कहा जाता हैं कि रुद्राक्ष (Rudraksha) कि उत्पत्ति भगवान शिव (Lord Shiva) के आंसुओं (Tears) से हुई है। इस बारे मे पुराण मे एक कथा भी प्रचलित है। दोस्तों कहतें हैं कि एक बार भगवान शिव (Lord Shiva) ने अपने मन को वश मे कर दुनिया के कल्याण के लिए सैकड़ों सालों तक तप किया। एक दिन अचानक ही उनका मन दुःखी हो गया, तब उन्होंने अपनी आँखे खोलीं तो उनमें से उनकी आंसुओं की बूँदें गिर गयीं, इन्हीं आंसूं कि बूंदों से रुद्राक्ष (Rudraksha) नामक वृक्ष (Tree) उत्पन्न हुआ। भगवान शिव (Lord Shiva) हमेशा ही अपने भक्तों पर कृपा करतें हैं। उनकी लीला से ही उनके आंसूं आकार ले कर स्थिर अर्थात जड़ हो गए। जनधारणा के अनुसार अगर भगवान शिव (Lord Shiva) और माता पार्वती (Maa Parvati) को खुश करना हो तो रुद्राक्ष (Rudraksha) धारण करना चाहिए।

“रुद्राक्ष (Rudraksha) का अक्ष हमें रक्षा व सुरक्षा प्रदान करता है, और हमारी आध्यात्मिक यात्रा में बाधाओं का सामना करने में हमारी मदद करता है। शिव पुराण में कहा गया है कि रुद्राक्ष पहनने वाला भगवान शिव (Lord Shiva) के साथ पहचान प्राप्त करता है।“

रुद्राक्ष (Rudraksha) का प्रमुख गुण व्यक्ति को निर्भीक बनाना है। शक्ति, शिव (Shiva) के साथ संयुक्त होकर रुद्राक्ष (Rudraksha) को उसका मूलभूत गुण प्रदान करती है। रुद्राक्ष (Rudraksha) को समझने के कई रास्ते हैं। उनमें सबसे ज्यादा दिल को छू जाने वाला है शिव भगवान् (Lord Shiva) द्वारा रुद्राक्ष (Rudraksha) को अपना अलंकार बनाना है। भगवान् शिव (Lord Shiva) शक्ति के प्रतीक आभूषणों का प्रयोग करते हैं, जिनका अपना ही एक सौंदर्य है।

दोस्तों अब सवाल उठता है कि रुद्राक्ष (Rudraksha) है क्या ?

रुद्राक्ष (Rudraksha) एक पेड़ के सूखे बीज होते हैं, जिन्हें वनस्पति (Biological) रूप से एलाओकार्पस गनीट्रस (Elaeocarpus Ganitrus) के रूप में जाना जाता है। यह एक बड़ा सदाबहार पेड़ (Evergreen Tree) है जो आमतौर पर एक उपोष्णकटिबंधीय जलवायु (Subtropical Climate) में बढ़ता है। यह पेड़ मुख्य रूप से हिमालय की तलहटी में (Foothills of Himalyas), गंगा के मैदानों (Gangetic Plains) और इंडोनेशिया (Indonesia) और पापुआ न्यू गिनी (Papua New Guinea) सहित दक्षिण पूर्व एशिया (South East Asia) के क्षेत्रों में पाया जाता है।

रुद्राक्ष के बीज (Rudraksha Seeds) को ब्लूबेरी के बीज (Blueberry Seeds) के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि पूरी तरह से पकने पर बीज का बाहरी भाग जामुन के सामान नीला (Blue) होता है। भगवान शिव (Lord Shiva) को भी अक्सर नीले रंग का प्रतिनिधित्व करते हुए अनंत (Infinity) का प्रतिनिधित्व किया जाता है। इस बीज का आध्यात्मिक साधकों (Spiritual Seekers) के बीच बहुत महत्व है क्योंकि इसका भगवान शिव (Lord Shiva) के साथ संबंध है। यह उन आंसुओं (Tears) की अभिव्यक्ति के रूप में पूजनीय है जिन्हें भगवान एक बार वहा चुके हैं।

रुद्राक्ष (Rudraksha) अलग-अलग आकार और अलग-अलग रंगों मे मिलता है। जब रुद्राक्ष (Rudraksha) का फल सूख जाता है तो उसके सर का छिलका उतार लिया जाता है। इसके बाद इसके अंदर से गुठली प्राप्त होती है, यही असल रूप मे रुद्राक्ष (Rudraksha) है। इस गुठली के ऊपर १ से १४ (1 to 14) तक धारियां बानी रहती हैं और इन्हे हीं मुख (Mukh/Faces) कहा जाता है।

रुद्राक्ष को आकर के हिसाब से तीन भागों मे बांटा गया है

  • आंवले के फल के बराबर रुद्राक्ष (Rudraksha)
  • बेर के फल के सामान रुद्राक्ष (Rudraksha)
  • चने के आकार वाले रुद्राक्ष (Rudraksha)
  • दोस्तों जिस रुद्राक्ष को(Rudraksha) कीड़ों ने ख़राब कर दिया हो या टूटा फूटा हुआ हो या जिसमें उभरे हुए दानें न हो, ऐसे रुद्राक्ष (Rudraksha) नहीं पहनने चाहिए।

ऋगवेद (Rig Veda) रुद्राक्ष (Rudraksha) को शिव भगवान (Lord Shiva) से जोड़ता है। लेकिन पहले, हम रुद्र (Rudra) का अर्थ देखें।

ऋग्वेद में कहा गया है – रुक् द्रव्यति इति रुद्र। As per the Rig Veda – Rukha Dravyati Iti Rudra. रूखा का अर्थ है दुख और द्रव्य का अर्थ है मिटना। रुद्र (Rudra) वह है जो दुख को मिटाता है। दूसरे शब्दों में, रुद्र दुःख के आँसुओं को आनंद के आँसुओं में बदल देता है जिसे रुद्राक्ष (Rudraksha) द्वारा दर्शाया जाता है।

श्वेताश्वतर उपनिषद (Svetasvatara Upanishad) में सर्वोच्च चेतना (ब्रह्म) Brahmin की पहचान रुद्र (Rudra) से की गई है। वह सिर्फ विध्वंसक नहीं है, बल्कि सर्वोच्च स्वयं है। रूड का अर्थ है “रोना” और रा प्रकाश है, एक दिव्य चेतना, जो पूरे ब्रह्मांड (Entire Cosmos) को व्याप्त करती है। जब कोई भी दिव्यता का अनुभव करता है, तो आंखों की बाढ़ खुल जाती है, जिससे खुशी के आंसू निकलते हैं। रुद्र (Rudra) वह चेतना है जो प्रेम, आनंद और कृतज्ञता के आँसू लाती है। किंवदंती (Legends) के अनुसार, यह स्वयं भगवान के मामले में भी सच पाया गया था। यह हमें रुद्राक्ष (Rudraksha) की उत्पत्ति की ओर ले जाता है, जिसका अर्थ है “रुद्र के आँसू” (the tears of Rudra), अक्स का अर्थ है आँसू।

रुद्राक्ष का वैज्ञानिक महत्व (The Scientific importance of Rudraksha Bead)

वेदों में, रुद्र हवा और तूफान से भी जुड़े हैं। यह हवा कोई साधारण हवा नहीं बल्कि ब्रह्मांडीय हवा है। वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि पूरा ब्रह्मांड (Universe) कई कणों से व्याप्त है जो निरंतर गतिमान हैं, और अंतरालीय पदार्थ का गठन करते हैं। यह मामला नए आकाशीय पिंडों के विनाश और निर्माण की ओर जाता है। यह ये कण हैं जो एक वस्तु को दूसरे से जोड़ते हैं और सृष्टि और मनोरंजन के चक्र को बनाए रखते हैं। इन कणों की गति के कारण आने वाली हवाएं ब्रह्मांडीय हवाएं (Cosmic Winds) हैं। ये हवाएँ बहुत शक्तिशाली होती हैं और ब्रह्मांड में अपनी कर्कश ध्वनि बनाती हैं, जो मानव कान (Human Ear) से अप्रभावित होती हैं।

हमारे पुराणों में एक देवता के रूप में रूद्र इस विनाशकारी ध्वनि के साथ जुड़े हुए हैं। यह विनाश नकारात्मक रूप से नहीं लिया जाना है, लेकिन पुनर्जनन के लिए है। रुद्र इन ब्रह्मांडीय हवाओं (Cosmic Winds) का प्रतिनिधित्व करता है, सार्वभौमिक ऊर्जा (Universal Energy) बहुत ही शक्तिशाली है और पूरे ब्रह्मांड में लगातार शक्तिशाली है।

चलिए जानते हैं कि लौकिक हवाओं और रुद्राक्ष के बीच क्या संबंध है? (Connection between the Cosmic Winds and Rudraksha)

रुद्राक्ष (Rudraksha) को रुद्र आकर्षण शब्द से भी उत्पन्न गया है, जहाँ आकर्षण का अर्थ है आकर्षित करना। रुद्राक्ष (Rudraksha) वह है जो रुद्र या ब्रह्मांडीय कणों को आकर्षित करता है, एक एंटीना की तरह हमारे पूरे शरीर में उन्हें प्रसारित करता है। रुद्राक्ष से आकर्षित ये ऊर्जाएँ हमारे सिस्टम में जीवन शक्ति लाती हैं, जिससे नकारात्मकता दूर होती है।

रुद्राक्ष पहनने के फायदे (Benefits of Rudraksha)

प्रौद्योगिकी संस्थान में वैज्ञानिकों के एक दल द्वारा किए गए शोध से पता चला है कि रुद्राक्ष के बीजों में सूक्ष्म विद्युत चुम्बकीय परमाणु होते हैं जो हमारे शरीर को प्रभावित करते हैं।

चलिए जानते हैं कि रुद्राक्ष माला पहनने के क्या लाभ हैं? (Benefits of wearing Rudraksha)

108 मनकों वाले रुद्राक्ष माला पहनने के कई फायदे हैं।

  • रुद्राक्ष (Rudraksha) शरीर के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है
  • विशेष ऊर्जा का संचार करता है जिसका शरीर, मन और आत्मा पर सकारात्मक (Positive) प्रभाव पड़ता है
  • नकारात्मक (Negative) कर्म को कम करता है
  • एकाग्रता में सुधार करता है
  • हानिकारक ग्रहों के प्रभाव (Harmful Planetary Effcets) को दूर करता है
  • शांति और सद्भाव लाता है
  • तनाव को नियंत्रित करने और रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करता है
  • चक्रों को संतुलित करता है और संभावित बीमारियों को दूर करता है
  • रुद्राक्ष के प्रकार और उनका महत्व (Types of Rudraksha and their importance)

रुद्राक्ष 1 मुख से लेकर 21 मुखी (1 Mukhi to 21 Mukhi) तक अलग-अलग मुखी या चेहरे में आता है। इनमें से 1 से 14 आसानी से उपलब्ध हैं। प्रत्येक रुद्राक्ष का अपना महत्व है।

एक मुखी रुद्राक्ष (1 Mukhi Rudraksha) भगवान शिव (Lord Shiva) इस रुद्राक्ष के संरक्षक देवता हैं। यह सर्वोच्च चेतना के बारे में जागरूकता लाता है।

दो मुखी रुद्राक्ष (2 Mukhi Rudraksha) शिव और शक्ति के संयुक्त रूप अर्धनारीश्वर, इस रुद्राक्ष के संरक्षक देवता हैं। यह एकता और सद्भाव लाता है और गुरु-शिष्य संबंध का प्रतिनिधित्व करता है।

तीन मुखी रुद्राक्ष (3 Mukhi Rudraksha) अग्नि या अग्नि इस रुद्राक्ष की अपनी दिव्यता है। यह पिछले कर्म के बंधन से मुक्ति की सुविधा देता है।

चार मुखी रुद्राक्ष (4 Mukhi Rudraksha) गुरु इस रुद्राक्ष के संरक्षक देवता हैं। यह उच्च ज्ञान के साधकों की मदद करता है।

पांच मुखी रुद्राक्ष (5 Mukhi Rudraksha) कालाग्नि रुद्र इस रुद्राक्ष की अध्यक्षता करते हैं। यह रुद्राक्ष हमारी आंतरिक जागरूकता को बढ़ाता है, जिससे हम अपने उच्च स्व में पहुँचते हैं।

छह मुखी रुद्राक्ष (6 Mukhi Rudraksha) भगवान कार्तिकेय इस रुद्राक्ष के संरक्षक देवता हैं। यह समग्र संतुलन और भावनात्मक स्थिरता लाता है।

सात मुखी रुद्राक्ष (7 Mukhi Rudraksha) देवी लक्ष्मी इस रुद्राक्ष के संरक्षक देवता हैं। यह धन के नए अवसर लाता है और हमारे स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।

आठ मुखी रुद्राक्ष (8 Mukhi Rudraksha) भगवान गणेश इस रुद्राक्ष के संरक्षक देवता हैं। यह रुद्राक्ष बाधाओं को दूर करने की सुविधा देता है।

नौ मुखी रुद्राक्ष (9 Mukhi Rudraksha) देवी दुर्गा इस रुद्राक्ष की अध्यक्षता करती हैं। यह शक्ति और गतिशीलता का प्रतिनिधित्व करता है और हमें सांसारिक आनंद और मुक्ति दोनों प्राप्त करने में मदद करता है।

दस मुखी रुद्राक्ष (10 Mukhi Rudraksha) भगवान कृष्ण इस रुद्राक्ष के संरक्षक देवता हैं। यह प्यार और शांति का प्रतिनिधित्व करता है। शास्त्रों के अनुसार, यह सबसे शक्तिशाली रुद्राक्षों में से एक है।

ग्यारह मुखी रुद्राक्ष (11 Mukhi Rudraksha) इस रुद्राक्ष के पीठासीन देवता हैं। यह ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को कम करता है।

बारह मुखी रुद्राक्ष (12 Mukhi Rudraksha) सूर्य इस रुद्राक्ष के संरक्षक देवता हैं। यह चमक और शक्ति लाता है, हमें आत्म-सम्मान से छुटकारा दिलाता है, जिससे आत्म-प्रेरणा मिलती है।

तेरह मुखी रुद्राक्ष (13 Mukhi Rudraksha) कामदेव इस रुद्राक्ष के संरक्षक देवता हैं। यह हमारे भीतर आकर्षण को प्रकट करता है और कुंडलिनी और अन्य शक्तियों (सिद्धि) के जागरण की भी सुविधा देता है।

चौदह मुखी रुद्राक्ष (14 Mukhi Rudraksha) भगवान हनुमान (Lord Hanumaan) इस रुद्राक्ष के संरक्षक देवता हैं। यह साहस और इच्छा शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है।

प्राचीन काल से हजारों लोग रुद्राक्ष माला (Rudraksha Mala) पहनते हैं क्योंकि यह कई आध्यात्मिक शक्तियों का खजाना है। चाहे आपके द्वारा पहने गए रुद्राक्ष (Rudraksha) एक या दस, या पंद्रह चेहरे हों, इसके कुछ शारीरिक और ऊर्जावान प्रभाव हैं। यदि रुद्राक्ष अच्छा है और यह आपके शरीर विज्ञान के लिए कुछ अच्छा करता है, तो यह पर्याप्त है।

ॐ नमो नमः शिव शिवाय नमो नमः

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